Aadhunik Bharat ka Aarthik Itihas (PB) | Dhanpati Pandey (Author) | MLBD Publications
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Aadhunik Bharat ka Aarthik Itihas (PB) | Dhanpati Pandey (Author) | MLBD Publications -आधुनिक भारत का आर्थिक इतिहास, 1850 से 1947 तक, ब्रिटिश शासन के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था के विकास और परिवर्तन का अध्ययन है। इसमें औपनिवेशिक शासन के तहत भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों, जैसे कि विऔद्योगीकरण, व्यापार नीतियों, और ब्रिटिश नीतियों के परिणामों पर प्रकाश डाला गया है। 1. औपनिवेशिक भारत का आर्थिक इतिहास: विऔद्योगीकरण: ब्रिटिश शासन के दौरान, भारत के पारंपरिक शिल्प उद्योगों का पतन हुआ, जिससे देश की अर्थव्यवस्था में बदलाव आया। व्यापार और निवेश: ब्रिटिश नीतियों ने भारतीय व्यापार और निवेश को प्रभावित किया, जिससे ब्रिटेन को लाभ हुआ और भारत की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। कृषि: ब्रिटिश शासन के दौरान, कृषि क्षेत्र में भी बदलाव हुए, जैसे कि भूमि कर प्रणाली में परिवर्तन और नकदी फसलों पर जोर, जिसने किसानों के जीवन को प्रभावित किया। औद्योगिक विकास: ब्रिटिश शासन के दौरान, भारत में औद्योगिक विकास सीमित था, और अधिकांश उद्योग ब्रिटेन में स्थापित थे। 2. स्वतंत्रता के बाद भारत का आर्थिक इतिहास: योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था: स्वतंत्रता के बाद, भारत ने एक योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था को अपनाया, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र और सरकारी नियंत्रण को महत्व दिया गया। आर्थिक सुधार: 1991 में, भारत ने आर्थिक सुधारों को लागू किया, जिससे उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण को बढ़ावा मिला। आर्थिक विकास: स्वतंत्रता के बाद, भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी से विकास हुआ, और यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गई। 3. आधुनिक भारत के आर्थिक इतिहास के स्रोत: साहित्यिक स्रोत: ब्रिटिश शासन के दौरान लिखे गए दस्तावेज, जैसे कि आधिकारिक अभिलेख, समाचार पत्र, और व्यक्तिगत संस्मरण, आधुनिक भारत के आर्थिक इतिहास के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं। पुरातात्विक स्रोत: किले, इमारतें, और व्यापार गोदाम जैसे पुरातात्विक स्थल, आर्थिक और सामाजिक जीवन के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं। Hindi Edition








