I Am Shiva: The Power of my Consciousness (Hindi Edition) (PB) | By Prof. (Dr.) Raj Nehru (Author) | MLBD Publications
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पुस्तक परिचय:
"मैं शिव हूँ" कश्मीर शैव दर्शन की गहन दार्शनिक परंपरा का अन्वेषण करती है और परम शिव को केवल कैलाश पर्वत पर ध्यानमग्न योगी के रूप में नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि में व्याप्त सार्वभौमिक चेतना के रूप में प्रस्तुत करती है। यही चेतना शिव तत्त्व से पृथ्वी तत्त्व तक 36 तत्त्वों के माध्यम से अवतरित होकर शिव से जीव तथा ब्रह्मांड से सूक्ष्म जगत तक एक अखंड सेतु का निर्माण करती है, जो समस्त चेतन और जड़ अस्तित्व को परस्पर जोड़ती है। प्रत्यभिज्ञा हृदयम् के सूत्र “चिति स्वतन्त्र विश्वसिद्धिहेतुः” पर आधारित यह पुस्तक प्रत्येक व्यक्ति के भीतर निहित दिव्य सामर्थ्य को उद्घाटित करती है और बताती है कि हर मनुष्य में अपने जीवन को रूपांतरित करने की दृष्टि तथा स्वतंत्र इच्छा विद्यमान है। अहंकार की सीमाओं को पहचानकर और उनका अतिक्रमण करके व्यक्ति अपने उस सार्वभौमिक स्वरूप से जुड़ सकता है जो असीम ज्ञान और क्रियाशक्ति से सम्पन्न है। यह पुस्तक जीव से शिव तक की यात्रा का मार्गदर्शन प्रदान करती है, यह दर्शाते हुए कि अपनी अंतर्निहित चेतना की परतों को पहचानकर और उन्हें उद्घाटित करके हम सार्वभौमिक चेतना की ओर आरोहण कर सकते हैं तथा आत्मविश्वास के साथ यह उद्घोष कर सकते हैं—“मैं शिव हूँ।” पुस्तक में प्रस्तुत विशिष्ट विज़न मॉडल पाठकों को लेन-देन आधारित दृष्टि से पारलौकिक दृष्टि की ओर अग्रसर होने का मार्ग दिखाता है और जीवन के शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक तथा सार्वभौमिक स्तरों के संतुलित प्रबंधन हेतु व्यावहारिक समाधान प्रदान करता है। इसके माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि भौतिक जगत त्यागने योग्य नहीं, बल्कि स्वीकार करने और रूपांतरित करने योग्य है, तथा दैनिक जीवन में आध्यात्मिक साधनाओं को समाहित करके व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत आकांक्षाओं और उच्चतर जीवन-उद्देश्य के बीच एक सामंजस्यपूर्ण संतुलन स्थापित कर सकता है।











