Melapak Memansa |Mridula Trivedi|PB|Mlbd Publications
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ग्रन्थ परिचय: मेलापक मीमांसा उन अनिर्वचनीय संकल्पों का साकार स्वरूप है जो मेलापक के विधान से सम्बन्धित एवं सर्वोपयोगी विशद विषय से सम्बद्ध, सघन सामग्री तथा समृद्ध शोध के अभाव के फलस्वरूप अंकुरित, प्रस्फुटित, पल्लवित, पुष्पित हुए थे। असंतुलित, अस्थिर, अनिष्टकारी दाम्पत्य जीवन की समस्त संभावनाओं को ध्वस्त करने के उपरांत सुखद दांपत्य जीवन व्यतीत करने के उद्देश्य से हर्षोल्लास के इन्द्रधनुषी रंगों के सुरभित अनुराग के अंतरंग आनन्द से संतुष्ट हो जाने हेतु सबल आधार वर-वधू के जन्मांगों के विवाह सम्बन्धी मिलान की अनिवार्यता है। जन्मांगों का मिलान जितना तर्कसम्मत एवं शास्त्रसंगत होगा, दाम्पत्य जीवन उतना ही स्थायी, समृद्ध एवं उल्लास से आनन्दित और आह्लादित होगा। ज्योतिर्विज्ञान के अनेक मूर्धन्य विद्वानों ने नक्षत्र मेलापक अर्थात् अष्टकूट मिलान की वर्तमान प्रविधि की प्रामाणिकता पर संदेह तो व्यक्त किया है परंतु मेलापक के प्रचलित विधान का विकल्प प्रस्तुत करने की चेष्टा नहीं की है। प्रचलित एवं परंपरागत अष्टकूट मिलान, नाड़ीकूट साम्य एवं मंगलीदोष के सम्यक् मिलान के उपरांत भी विवाह असफल होने के कारण मेलापक विज्ञान से संबंधित अज्ञानता ही है जिसकी विशद व्याख्या व विवेचना मेलापक मीमांसा में सन्निहित है। लेखकद्वय के चालीस वर्षों के श्रमसाध्य अनुसंधान का प्रतिफल है मेलापक मीमांसा, जिसमें प्रतिपादित अभिनव अनुसंधान अभियान तेरह अध्यायों में व्याख्यायित हैं। उपयुक्त वर-वधू एवं तर्कसम्मत मुहूर्त; नाड़ीमान विवाह पटल; अष्टकूट मिलान रहस्य; नाड़ीदोष : परिचय एवं परिहार, मंगलीदोष का संत्रास, शमन एवं संतुलन; वर-कन्या चुनाव : ज्ञातव्य तथ्य; अष्टकूट मिलान : प्रखर अनुसंधान; जन्मांग मिलान: अभिनव प्रावधान; आनुकूल्य: सहज विमर्श, विवाह में ध्यातव्य तथ्य एवं जिज्ञासा समाधान; विवाह व विज्ञान : रक्तसमूह मिलान; विवाह मुहूर्त साधन की विस्तृत व्याख्या अनेक व्यावहारिक जन्मांगों एवं उदाहरणों के आधार पर मेलापक मीमांसा में सन्निहित है। इस कृति की संरचना का उद्देश्य मानवता के कल्याण एवं उत्थान हेतु सुखद दाम्पत्य के आधार स्तम्भ की स्थापना है। करोड़ों दम्पतियों के जन्मांगों के सुखद मेलापक के उपरान्त वैवाहिक विसंगतियों से सम्बन्धित संशय एवं आशंकाओं की समस्त संभावनाओं को निरस्त करने हेतु मेलापक मीमांसा निःसन्देह कंचन सिद्ध होगी, जो सुखद दाम्पत्य जीवन को अभिनव गतिमति, समुचित दिशा और प्रबल आधार प्रदान करेगी।








