Pracheen Bharat Ka Samajik Evam Aarthik Itihas |Shiv Swaroop Sahay|PB|Mlbd Publications
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समाज और जीवन अन्योन्याश्रित हैं। समांज के बिकास की कथा एक गम्भीर विवेचन है। उसमें भी हिन्दू समाज, जिसके मूल्य परम्परा से आज भी शाश्वत हैं भले ही समय के प्रवाह ने इसके स्वरूप को परिवर्तित किया है। इसी अक्षुण्ण परम्परा की लीक की खोज इस ग्रंथ का उद्देश्य है। हिन्दी भाषा में अभी तक किसी प्रामाणिक ग्रंथ के अभाव के कारण इसका पहला संस्करण ' हिन्दू सामाजिक .संस्थाए' शीघ्र ही समाप्त हो गया। अध्येताओं की मांग पर इसमें आर्थिक जीवन जोड़कर 'हिन्दू सामाजिक संस्थाएँ एवं आर्थिक जीवन' नाम से प्रकाशित इसका दूसरा संस्करण तीन वर्षों में ही समाप्त हो गया।








