Pracheen Bharat Me Khagol Vigyan|Priyanka Gupta|MLBD Publications
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प्राचीन भारत में खगोलीय ज्ञान की परंपरा अत्यंत विस्तृत एवं समृद्ध थी | प्रस्तुत पुस्तक ‘प्राचीन भारत में खगोल विज्ञान’ की परिसीमा खगोलविद् ब्रह्मगुप्त तक ही प्राप्त खगोलीय ज्ञान तक परिसीमित है | प्राचीन भारत में खगोल विज्ञान का सम्बन्ध ज्योतिषशास्त्र के सैद्धांतिक पक्ष से जुड़ा था जिसके अंतर्गत ग्रहों एवं अन्य आकाशीय पिण्डो की स्थिति का अध्ययन किया जाता है किन्तु इसमें इस तथ्य का अध्ययन नहीं किया जाता है कि ये आकाशीय पिंड किस प्रकार हम पर एवं संपूर्ण समाज पर प्रभाव डालते है अर्थात् ये किस प्रकार हमारे हितैषी होते है और अगर नहीं है तो किस प्रकार बनाये जा सकते है | इन तथ्यों का अध्ययन ज्योतिष शास्त्र के व्यवहारिक पक्ष (फलित ज्योतिष) के अंतर्गत किया जाता है | इस प्रकार खगोल विज्ञान जहां एक तरफ ज्योतिषशास्त्र के सैद्धांतिक पक्ष से जुड़ा है तो वही दूसरी तरफ इसके व्यवहारिक पक्ष से भी जुड़ा है | प्रस्तुत पुस्तक में दोनों पक्षों को समावेशित करते हुए इस विषय की उपयोगिता को समझने का प्रयास किया गया है |











