Vedantsar Sadanandkrit |Badrinath Shukla|PB|Mlbd Publications
We deliver books worldwide
Free shipping within India
100% Customer Satisfaction
वेदान्तसारः आचार्य बदरीनाथशुक्लः श्रीसदानन्द योगीन्द्र विरचित वेदान्तसार अद्वैत वेदान्त का अनुपम ग्रन्थ है। वेदान्त जैसे गम्भीर विषय को अत्यन्त सरलता से प्रतिपादन करने में सदानन्द अद्वितीय माने गये हैं। इस ग्रन्थ पर प्राचीन एवं नवीन विद्वानों की कई टीकाएँ प्रकाशित हैं-जैसे आचार्य नृसिंह सरस्वती की सुबोधिनी, आचार्य आपोदेव की बालबोधिनी। किन्तु इन सब में सरल एवं छात्रोपयोगी रामतीर्थ यति की विद्वन्मनोरञ्जनी टीका है जो प्रस्तुत कृति में संलग्न है। इस संस्करण में वेदान्तसार का मूल पाठ, रामतीर्थ की मनोरञ्जनी टीका और इन पर आचार्य बदरीनाथ शुक्ल की हिन्दी व्याख्या है। ये तीनों परस्पर पूरक होकर वेदान्त के गूढ़ विषय को बोध कराने में सर्वथा समर्थ हैं। हिन्दी व्याख्या में गूढ़ार्थक पारिभाषिक शब्दों का विश्लेषण करते हुए व्याख्याकार ने प्रतिपक्षी मतों का सहेतुक खण्डन किया है, विशेषतः मीमांसकों में कुमारिल और प्रभाकर का, और नैयायिकों में गौतम का। और उन टीकाकारों के मन्तव्यों का भी जिन्होंने योगीन्द्र सदानन्द की एवं यति रामतीर्थ की आलोचना की है। इस संस्करण में चालीस पृष्ठों की भूमिका दी गई है जिसमें अद्वैत वेदान्त के अध्यारोप, अपवाद, अध्यास, महावाक्य, जीवनमुक्त आदि कठिन विषयों का विश्लेषण करते हुए आचार्य शुक्लजी ने अपनी अद्भुत मौलिकता का प्रदर्शन किया है।








